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संबंधों में फासला

  • radhakguru
  • Sep 24, 2020
  • 1 min read

जी हां, आजकल रिश्तों में वह प्यार समर्पण सहकारिता दिखाई नहीं पड़ती जितनी पहले कभी थी ,आज के रिश्ते रिश्ते नहीं एक औपचारिकता रह गई है । आपसी संबंधों में यदि प्यार नहीं है तो ऐसे रिश्तों में खटास आना स्वाभाविक है।आपस में मेल-मिलाप, समाचारों एवं वस्तुओं का आदान-प्रदान संबंधों को बांध कर रखता था पर अब वो बातें बहुत कम दिखाई पड़ती है। मेरे पिताजी कभी किसी से मिलने जाते थे कुछ न कुछ जरूर लें जाते थे बच्चों के लिए मीठी-मीठी गोलियां टाफी उनकी जेकिट में हमेशा रहती थी साथ ही सामने मिलने पर फूल जरूर भेंट करते थे। एकबार मेरे टीचर से मिलने मेरे साथ उनके घर गये। फ़ूल लाना भूल जाने पर उन्ही के गार्डन से फ़ूल तोड़कर भेंट कर दिया। मुझे थोड़ा अटपटा लगा पर मेरे टीचर बहुत खुश हो गये। मैं भी कभी किसी से मिलने जाता हूं छोटी छोटी भेंट देकर आत्मसंतोष प्राप्त करता हूं । वर्तमान में तुलसी, एलोवेरा, गिलोय निशुल्क घर से बांटकर आनंदित होता हूं आप भी अजमाकर देखिए... सचमुच बहुत खुशी मिलेगी -राधाकृष्ण गुरू

 
 
 

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