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यात्री हैं सब

  • radhakguru
  • Oct 22, 2020
  • 1 min read

जी हां, हमारे साथ के बहुत चले गए और चले जा रहे हैं जो फिट थे वो हिट है भी चले गए , कभी कभी कसक सी उठती है कि ऊपरवाला मेहरबान हैं और किसपर अगली नजर डालेगा। पर हमें अपने काम से काम रखना है ऊपर वाला अपना काम करें या न करें।दिन गुज़र रहे हैं एक हम हैं कि रोज़ कुछ न कुछ गढ़े जा रहे हैं बढ़ते ही जा रहे हैं अगली नई सुबह के लिए.. -राधाकृष्ण गुरू

 
 
 

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